Aug 29, 2008

लाली देखो लाल की... !

शीर्षक से तो आप अनुमान लगा ही नहीं सकते कि मैं क्या लिखने जा रहा हूँ. पहले इस दुःख और खुशी के संगम को बताने से पहले दो बातें बता दूँ.

- पहली ये की शुक्रवार का बड़ा बेसब्री से इंतज़ार रहता है. पहला तो सनातन कारण है: सप्ताहांत की शुरुआत. पुणे ऑफिस में ये खुशी दुगुनी हो जाती है क्योंकि इस दिन जींस-टी-शर्ट-स्पोर्ट-शू पहन कर ऑफिस जा सकते हैं. इसमें जो खुशी है वो शायद वही समझ सकता है जो चप्पल-हाफ पैंट और टी-शर्ट में क्लास जाता हो और अचानक आप उसे फोर्मल पहनने के बोझ तले दबा दो. साल में जीतनी बार दाढी बनाता हो महीने में उससे ज्यादा बार बनाने को बोल दो.

- दूसरी ये की न्युयोर्क ऑफिस में ऐसा नहीं होता यहाँ लोग कोई भी दिन हो शूट बूट में आते हैं, पर हमने ये फैसला लिया की चाहे जो भी हो पहले शुक्रवार को तो कुछ भी पहन के जाना बनता है. आगे से तो वैसे भी नहीं पहन पायेंगे ! तो हमने अपनी नई टी-शर्ट का उदघाटन कर दिया.

पूरे दिन तो ठीक रहा कुछ लोग अजीब निगाहों से देखते तो बस यही लगा की 'ऐसे ड्रेस में क्यों आ गए हो भाई?' वाली प्रश्न भरी दृष्टि है. असली बात तो शाम को पता चली.

अब किस्मत फूटी उसी दिन हमारे बॉस लंच पर लेकर चले गए, उन्हें भी यही दिन मिला था :( ... ख़ुद को बुरा लगा की ये क्या ड्यूड बन के आ गए हैं. चलिए इतना तो ठीक, ऐसी बातों से ज्यादा परेशान नहीं होता.

शाम को हमारे एक बहुत करीबी दोस्त हैं जो यहीं रहते हैं पिछले दो सालों से, पहला सप्ताहांत... तो मिलने आए. ४-५ घंटे साथ रहे, खूब भटके उनके साथ न्युयोर्क की गलियों में. बहुत अच्छा लगा, बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई थी पर चलते-चलते असली बात बता गए.
बोले:
'ये क्या पहन रखा है?'
'क्यों इसमें क्या बुराई है? भाई बहुत मंहगे कपड़े हैं, अच्छे नहीं लग रहे क्या?' (ना समझ में आए तो सवाल का जवाब सवाल ही हो सकता है !)
'देख अच्छे तो हैं, मस्त लग रहा है पर ये रंग...'
'रंग?'
'हाँ ये लाल-नीला रंग... ये सब यहाँ पहनोगे तो लोग समलैंगिक समझेंगे'
'व्हाट?' (ऐसे उलूल-जुलूल झटके लगे तो अंग्रेजी बोलना ही पड़ेगा)
'Welcome to America Dude ! चिल्ल मार, कोई नहीं!'

कोई तो नहीं और चिल्ल भी मार ली मैंने पर अब जाके माजरा साफ़ हुआ, कहाँ सुबह सोंच के निकले थे की आज तो कहर ढाएँगे और यहाँ .... ! अमेरिकी अंग्रेजी का एक ही शब्द मुंह से निकल सकता है: F*** !
क्या सोच रहे होंगे दिन भर लोग... ऑफिस में ! खैर उसने समझाया की वो भी कई बार पहन के चला गया और ठीक है इतना भी कुछ नहीं है पर आगे से मत पहनना ! जब इतना कुछ नहीं ही है तो आगे से क्यों नहीं पहनूं ? अब दोस्त है तो क्या कहे बेचारा ! तसल्ली देना तो फर्ज बनता है.

अब आप कहेंगे की इस दुःख भरी दास्ताँ में खुशी का लम्हा कहाँ मिल गया? अरे भाई नई टी-शर्ट कम से कम एक दिन तो पहन ली पहले ही पता चल गया होता तो बेचारी धरी की धरी रह जाती. अब क्या करुँ कैसे भी हालात हो अपनी तो खुशी ढूंढ़ लेने की आदत है :-)



किसी समलैंगिक भाई को बुरा लगे तो माफ़ी भई, इस पोस्ट का मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाना नहीं है. मैं तो शत-प्रतिशत सच और आपबीती सुना रहा हूँ. आपलोग सामान्य न सही सामान्य रूप से रह तो सकते हैं, मानता हूँ सबको आपना साम्राज्य विस्तार अच्छा लगता है पर कपडों को तो छोड़ सकते थे... ऐसे ही लडकियां नहीं मिलती और अगर कपडों के कारण (वो भी जब अपने दिमाग में हो की मस्त कपड़े पहन रखे हैं) ऐसा हो तो.

छोडो यार आप लोगों को क्या मालूम कि लड़की क्या चीज़ होती है !


~Abhishek Ojha~

17 टिप्पणियाँ:

Lavanyam - Antarman उवाच

अभिषेक भाई,
ये भी जज़ब रहा ! आपकी ये १ दिन पहनी टी शर्ट की तस्वीर भी बता देते ! और कपडोँ मेँ तो यहाँ पुरुषोँ के हिस्से लाईट ब्यु शर्ट, या ज्यादातर सुफेद शर्ट ही सबसे ज्यादा प्रचलित है - समर तक ग्रे, लाईट ब्राउन सुट, और सर्दीयोँ मेँ गहरा नेवी ब्ल्यु और सबसे ज्यादा प्रचलित गहरा काला
चारकोल रँग चलते हैँ न्यु योर्क और पूर्व अमरीका मेँ लोग ज्यादा वेल ड्रेस्ड होते हैँ केलीफोर्नीया और दक्षिण अमरीका मेँ गर्मियोँ की वजहसे रँगीन, खुले बुश शर्ट पहने अकसर लोग दीख जाते हैँ - फ्लोरीडा का भी यही हाल है - स्नोबरी और स्टेटस और शान दीखाने मेँ न्यु योर्क पहले नँबर पर है
इन सब मेँ - अपवाद तो खैर हर जगह देखने मिल जाते हैँ - " enjoy the long weekend of Labor Day holidays "
sneh,
- लावण्या

अनूप शुक्ल उवाच

मजेदार। फोटो दिखाओ भाई नयी टी-शर्ट वाली।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन उवाच

अभी टी-शर्ट के रंग की बात है, कल तुम्हारे गुलाबी बालों (गुलाबी गाल तक तो सब ठीक है) पर भी कुछ का कुछ सोच सकते हैं. उनको मिर्ची लगी तो मैं क्या करुँ? मस्त रहो, और क्या करोगे?

singhsdm उवाच

क्या बात है अभिषेक जी, मगर आप दूसरों की चिंता छोडिये और वीकएंड पर लाल- नीला रंग की टीसर्ट पहनिए देखे कौन क्या कर लेता है ......आप तो मोस्ट एलिजिबल बेचलर हैं भाई...लोग जलते हैं इसलिए ऐसा बोलते हैं....ध्यान मत दो

महेन उवाच

इंग्लैंड में भी कैज़ुअल्स का फ़ैशन नहीं है। महीने में एक दिन ड्रेस-डाउन होता है जब लोग कैज़ुअल्स पहनकर आते हैं और उस दिन सभी के लिये चैरिटी करना ज़रूरी होता है। अपन तो हर शुक्र को पहन जाते थे और कभी चैरिटी नहीं की। ;)
10-12 साल पहले मंडी-हाउस के पास लुटविन-दिल्ली के किसी रईस के इम्पोर्टेड कुत्ते को सुबह-सुबह की सैर कराते एक नौकर की टी-शर्ट पर नज़र गई तो चौंक गया। लिखा था "आई एम लेस्बियन"। शायद मेमसाहब की पुरानी टी-शर्ट पहन ली थी। सही कहा है "ignorance is bliss"
तो भाई भूल जाओ रंग-बिरंगी टीशर्ट पहनने से लोग क्या सोचेंगे।

PD उवाच

मस्त रहा..
आप एक फोटो भी चिपका ही दिजिये.. :)

Neeraj Rohilla उवाच

अभिषेक भाई,
आजकल न्यूयार्क में हो क्या? अपना फोन नंबर बताइये, कम से कम फोन पर बातचीत हो सके | हम तो अभी भी विद्यार्थी ही हैं, चप्पल, मैली टी शर्ट और शार्टस का अपना ही मज़ा है |

रंजना [रंजू भाटिया] उवाच

हा हा :) मजेदार ..एक फोटवा तो लगाओ अपना यहाँ उस टी शर्ट में जिसने इतनी मजेदार पोस्ट लिखवा दी है तुमसे :)

महामंत्री-तस्लीम उवाच

चलिए इसी बहाने अमेरिकी जीवन का एक यथार्थ तो समझ में आया।
जाकिर अली "रजनीश"

अनुराग उवाच

सही फंडे है इन लोगो के .कुछ दिन पहले कही पढ़ रहा था की लो वेस्ट जेंस का फैशन भी यही लोग लेकर आये थे .अपनी हिन्दुस्तान की लड़किया सुन ले तो बेचारी पहनना छोड़ दे...वैसे भी लाल रन्ग इधर प्रचलन में नही है ..केवल सलमान खान ही लाल रंग की पैंट पहन सकते है ....१० साल पहले जब allen solly इंडिया में आया था तब friday ड्रेसिंग का फंडा पता नही था ..कॉलेज टाइम में शर्ट पैंट पहनकर इतराते थे ....बाद में clear हुआ ओर जिसका लुत्फ़ आप उठा रहे है ..वैसे अमेरिकानो को बहुत अच्छा सेंस ऑफ़ ड्रेसिंग में नही माना जाता ....ब्रिटिश की अपेक्षा ....
पर एक बात का शुक्र है ..की यहाँ होमो की संख्या ना के बराबर है ....

योगेन्द्र मौदगिल उवाच

मैं सभी से सहमत हूं..
इसी में भलाई नजर आ रही है...
kya khayaal hai aapka ?

Udan Tashtari उवाच

अब क्या करोगे उस टी शर्ट का?? इंडिया जाकर पहन लेना मगर फोटो तो लगा ही दो. देखो लितने सारे लोग देखना चाह रहे हैं- :)

जब मालूम ही नहीं तो सब चलता है..कोई हर्ज नहीं. आराम से टहलिये अमरीकन गलियों में.

Manish Kumar उवाच

bhai us aitihasic T Shirt ka baqayda display hona chahiye taki yaad rahe sabko ki kis rang se parhez karna hai.

Gyandutt Pandey उवाच

'हाँ ये लाल-नीला रंग... ये सब यहाँ पहनोगे तो लोग समलैंगिक समझेंगे'
रीयली? यहां आ जायें तो शोध कर सकते हैं कि आधा भारत गे (gay) है!

Lovely kumari उवाच

वाह अभिषेक भाई बड़ा एक्सपिरियंस लगता है लड़कियों का ...चलिए अब आप बता ही दीजिये हा हा :-)

राज भाटिय़ा उवाच

अभिषेक भाई ,आप का कया कहना, अरे उस टी शर्ट को ebay मे लगा दो कोई कहानी गढ कर फ़िर देखो......
मजा आ गया आप की राम कहानी सुन कर धन्यवाद

Arvind Mishra उवाच

दूसरी संस्कृति में ऐसा हो जाता है .......रोचक संस्मरण !