Oct 31, 2008

तेरे नाम का पासवर्ड

कल एक करीबी मित्र का फ़ोन आया. हॉस्टल में हुई इस दोस्ती के मतलब ही अलग होते हैं... इसमें एक-दुसरे की हर एक बात पता होती है. उस समय वो यात्रा कर रहा था और अविलम्ब उसे एक ईमेल किसी को फॉरवर्ड करना था... ये सूचित करने के तुरंत बाद उसने अपना पासवर्ड एसेमेस किया।

यहाँ तक तो सबकुछ ठीक पर उनका पासवर्ड देखकर अचानक ही चेहरे पे मुस्कान आ गई। ये पासवर्ड स्पष्ट रूप से उस लड़की के नाम से बना था जिसे देखकर (देखकर ही क्यों उसके बारे में सुनकर भी) कभी हमारे मित्र का दिल धड़का करता था।

खैर उसके इश्क के किस्से फिर कभी... वो अक्सर कहा करता 'आज फिर से पहला प्यार हो गया !' पर ऐसा पासवर्ड रखा जाना ये तो दिखाता ही है कि उन सारे पहले प्यारों में ये थोड़ा ज्यादा पहला था . *

हाँ इसके साथ ही एक और बात साफ़ हुई... पहले जिस अधूरे प्यार की जगह किसी किताब में, किसी नोवेल में या फिर क्लास नोट्स के आखिरी पन्नों पर होती थी (दिल के किसी कोने में होने के अलावा) उसको एक नई जगह मिल गई है... और कमाल की सुरक्षित जगह है... पासवर्ड ! अभी-अभी एक और फायदा सूझा... पासवर्ड भुलाने की समस्या से मुक्ति ! कुछ भी भूल जाओ ये भूलना थोड़ा मुश्किल है... हाँ अगर आपको रोज एक नई शख्शियत से प्यार हो जाता हो तो थोड़ा मुश्किल है पर उसमें भी वरीयता तो होगी ही !

हर लम्हा तेरी याद दिल में और
तू निगाहों में होती थी,
कभी किताबों में तो
कभी उनमें भटकते-सूखते फूलों पर,
कभी हथेली पर भी तो लिखा करता था...
अब तेरे उस नाम का पासवर्ड बना रखा है !


कहीं आपने भी ऐसा पासवर्ड तो नहीं रखा है? अगर मजबूरी में किसी को बताना पड़ जाए तो आपको कोई समस्या तो नही? खैर जब आप अपना पासवर्ड ही किसी को बता सकते हैं तो उसे ये जानकारी देने में भी कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए.

* 'All animals are equal, but some animals are more equal than others.' इसी के तर्ज पर.

~Abhishek Ojha~

36 टिप्पणियाँ:

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` उवाच

:) सबसे सुरक्षित जगह पर रखा आपके मित्र ने अपनी फेवरीट मित्र का नाम !
गोया...स्वीस एकाउन्ट हो गया ये तो !!
- लावण्या

अनूप शुक्ल उवाच

अपना पासवर्ड कब रखोगे जी!

Gyan Dutt Pandey उवाच

जब अपना समय था, तब पासवर्ड का जमाना न था। अब तो कुत्ता/बिल्ली/आलू/टमाटर ही काम आते हैं इस फील्ड में रचनात्मकता दिखाने में!:(

महेन उवाच

मेरा एक दोस्त है। हमारी महफ़िल उसके घर ही जमती थी। एक दिन वो लापता था और हमें कंप्यूटर में फ़िल्म देखनी थी जिसमें उसने पासवर्ड डाला हुआ था। दोस्त लोग बोले अब क्या करें। उन दिनों मोबाइल आम नहीं थे। मैनें थोड़ा सोचा और हम दोनों की एक कामन फ़ीमेल-मित्र का नाम टाइप कर दिया और चमत्कार - सिस्टम खुल गया।
वैसे वो छोकरी उस मित्र की धर्मपत्नी है आज।

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी उवाच

जिसे भूलना था,
उसे याद रखने का किया है
पुख्ता इंतजाम
चाबी में छुपा कर रखा है।

ताऊ रामपुरिया उवाच

भाई आपने तो कमाल का आईडिया दिया है ! हमारी ताऊ बुद्धि में तो यह बात अभी तक आई ही नही थी ! चलिए हम भी पुराने दिनों की याद करते हुए एक बार ऐसा कर के देख लेते पर क्या करे वो ही मोहतरमा आज कल आपकी ताई बन कर लट्ठ हाथ में रखती है ! :) कुछ नही हो सकता ताऊ का !

जितेन्द़ भगत उवाच

आइडि‍या बुरा नहीं है, लेकि‍न महेन जी ने जो कहा, वो खतरा तो रहेगा कि‍ आपके करीबी आपका पासवर्ड ट्रेस कर लेंगें :)

Udan Tashtari उवाच

हा हा, मजेदार॒॒॒

ranjan उवाच

इसी बहाने वो पुराने दोस्त को याद करता है...

अजित वडनेरकर उवाच

इश्क की चाबी !!!
बहुत खूब...

रंजना [रंजू भाटिया] उवाच

:) बहुत बढिया तरीका है यह भुला कर भी याद रखने का ..:)

डॉ .अनुराग उवाच

इसलिए तो कहते है की जिंदगी खूबसूरत है......बस आपको उसमे थोड़े से रंग घोलने आने चाहिए...सोचो कभी वही पासवर्ड अचानक .सामने आ जाये तो

Rajesh Roshan उवाच

मजेदार. प्‍यार का पासवर्ड या पासवर्ड प्‍यार का

pintu उवाच

ise saaf jahir hota hai ki aapka mitr us ladki se dil se pyaar karta hai isiliye us ladki ko dil me jagah di hai...lekin yaha " mahen ji" ka jaisaa hi koyi upyog karne laga to kyaa hoga!!!

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा उवाच

पासवर्ड तेरा हैं और उस पे दिल लगा मेरा . बहुत मजेदार रोचक

$udhi उवाच

dhanyawad !
aise toh aapka RSS feed roj padhate hai GReader se, par comment karne mein aalas aata hai :D (linux pe rahta hoon jadatar to devnagri lipi padhane ke liye font fixing karke hi dil khush ho gaya :D )
lekin aaj ye post padhkar purani yaadein taja ho gayi
mano ki dil ki bhulayi gayi tijori ki chabi mil gayi!! ;)
aise hi likhate rahiye
dipawali ki hardik shubhkamnaye

~$udhi :)
PS: i think i stumbled to your blog via vikash's blog few months ago

विनय उवाच
This post has been removed by the author.
योगेन्द्र मौदगिल उवाच

भई वाह ऒझा जी
पर ये तर्जिया उद्धरण कमाल का है
जय हो प्यारे

विनय उवाच

अक्सर ऐसा होता है हम अपनी किसी चहीती लड़की के नाम से ही अकॉउण्ट पासवर्ड बनाते हैं इसमें कुछ नया नहीं, पर लेख बढ़िया रहा!

राज भाटिय़ा उवाच

ओझा भाई कमाल कर दिया आप ने , चलिये अब पक्का याद रहेगा, धन्यवाद

swati उवाच

bada pyaara sa ehsaas chupaye hai aapka ye haasya....prem vyakt karne ka upay hai ye.......

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन उवाच

अब खाते हैं इतने और हर खाते के पासवर्ड का नियम अलग. अगर सबके नाम लिख दिए तो रात तो फ़िर सड़क पर ही गुजारनी पड़ेगी. अरे भई, तुम कुंवारे क्या जानो एक शादीशुदा भारतीय मर्द का दर्द.

Dr. Chandra Kumar Jain उवाच

बहुत रोचक है....बधाई.
फिर से हुए पहले प्यार की तरह
पढ़ गया आज यह पोस्ट !!!
=====================
शुभकामनाएँ अभिषेक.
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

Zakir Ali 'Rajneesh' उवाच

क्या बात है। आपके मित्र की यह अदा वाकई दिलचस्प है।

समीर यादव उवाच

यादों को किसी जतन की जरुरत नहीं होती, पर ये जतन याद के कारण ही होता जाता है.
हाँ तो ....... आपका पासवर्ड क्या.....है....!!!!!

मीनाक्षी उवाच

:) बेहद दिलचस्प .....

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर उवाच

बढ़िया है !
मैंने तो बीबी और बच्चों के नाम से पहले बना रखा है !
इसका मतलब मास्टर UPDATED है

सुशील कुमार छौक्कर उवाच

वाह जी क्या बात है। पर ये तरीका हमने तो पहले से ही आजमा रखा था। वैसे अनुराग जी ने सही कहा सोचो कभी वही पासवर्ड अचानक .सामने आ जाये तो..... दिल की धड़कने बढ जाती है जी।

swati उवाच

vah ojha ji
kya roomaniyat se bharpoor post hai.sach hi hai jise kabhi bhoole hi nahi, use bhala kya yad kare.
aaj jab jamana hitech ho gaya hai to kyo koi apne mahboob ka naam kitabo ke panne me chhupae.
-swati

swati उवाच

vah ojha ji
kya roomaniyat se bharpoor post hai.sach hi hai jise kabhi bhoole hi nahi, use bhala kya yad kare.
aaj jab jamana hitech ho gaya hai to kyo koi apne mahboob ka naam kitabo ke panne me chhupae.
-swati

लवली / Lovely kumari उवाच

आइडिया अच्छा है ..पर पहला प्यार अब तो याद भी नही हा हा हा

अर्शिया अली उवाच

बहुत खूब, क्या बात है।

hindustani उवाच

आपने दिल को भेदने वाली बात कर दी बहूत ही उम्दा सोच

योगेन्द्र मौदगिल उवाच

कहां फंस गये भाई...?

कंचन सिंह चौहान उवाच

BAAT TO MAJAAK KI HAI LEKIN SHAYAD AISA HO HI JAATA HAI.... PASSWORD LIKHNE CHALO TO NAAM SAB SE PAHALE SAB SE PRIYA KA HI YAAD AATA HAI

सागर नाहर उवाच

आपने तो मेरी भी पोल खोल दी, अब मैं कौनसी नंबर वाली के नाम का पासवर्ड डालूं?

मेरा ही क्यों कईयों को पासवर्ड बदलवा दिये आपने तो।
:)