Nov 28, 2008

भारत का ९/११ ?

भारत का ९/११?

करीब २ महीने पहले किसी ने मुझसे न्यूयॉर्क में कहा था: '९/११ को अमेरिका में सात साल हो गए. उसके बाद कोई अगर अमेरिका में आतंकवादी कार्यवाही की 'सोचता' भी है तो उसे सीआईए वाले पकड़ के ले जाते हैं !'

भगवान करे यह घटना इस सड़ी राजनीति और नेताओं के लिए यह '९/११' साबित हो.

क्या इससे घटिया गृहमंत्री सम्भव है? गृहमंत्री 'लौहपुरुष' होना चाहिए... जो है उसके लिए अभी कुछ नहीं सूझ रहा !

ज्ञानजी की टिपण्णी के बाद:

One more thing I don't understand 'what the f**k will ISI chief will do here? defend his country?'

~Abhishek Ojha~

19 टिप्पणियाँ:

राजन् उवाच

वोट की राजनीति ने आतंकी हमलों से निपटने की दृढ इच्छाशक्ति खत्म कर दी है, खुफिया तंत्र की नाकामयाबी की वजह भी सत्ता है, संकीर्ण हितों- क्षेत्र, भाषा, धर्म, जाति, लिंग- से ऊपर उठ कर सोचने वाले नेता का अभाव तो समाज को ही झेलना होगा, मुंबई हमलों के बारे में सुनने के बाद मैं काफ़ी बेचैन हूँ. सवाल है ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी का या कुछ और. इसे मैं सिर्फ़ राजनीतिक नाकामी कहूंगा जिसकी वजह से भारत में इतनी बड़ी आतंकवादी घटना हुई.यहाँ पर नेताओं से सिर्फ़ भ्रष्टाचार की उम्मीद की जा सकती है !

Anil Pusadkar उवाच

ये भी लोहे का बना हुआ है,मगर लोहा जँग खाया हुआ है.इसे कबाडी भी शायद ही खरीदे ,सिर्फ सोनिया के लिये एँटिक़ पीस है वो और उसके रहते कुछ नही हो सकता.

रंजना [रंजू भाटिया] उवाच

अभी आ रहे नेताओं एक बयानों से तो नही लगता की यह कहीं भी कभी सुधरने वाले हैं ..पहले अपने वोट की चिंता तो कर ले यह

कुश उवाच

9/11 बड़ी घटना थी, सिर्फ़ इसलिए अमेरिका ने ऐसा नही किया,, क्योंकि उनमे हिम्मत थी.. क्या इतनी हिम्मत है हमारे देश की खोखली राजनीति में?

Gyan Dutt Pandey उवाच

हमारे यहां तो आई.एस.आई. चीफ को निमन्त्रण भेजा गया है गुर सिखाने को।

Dr. Chandra Kumar Jain उवाच

अभिषेक,
आतंक देखने के आदी
देश वासियों को आतंक का अंत
देखने इंतज़ार है !
धमाकों से धराशायी
विश्वास को धरातल
चाहिए...भरोसे का...सुरक्षा का !
==========================
न जाने वह सुबह कब आयेगी ?
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi उवाच

हम खुद से
बदलना शुरू करें
अपना पड़ौस बदलें
और फिर देश को
रहें युद्ध में
आतंकवाद के विरुद्ध
जब तक न कर दें उस का
अंतिम श्राद्ध!

ताऊ रामपुरिया उवाच

भगवान करे यह घटना इस सड़ी राजनीति और नेताओं के लिए यह '९/११' साबित हो.
भाई ओझा जी , आपके मुंह में घी शक्कर ! ये आपने कायदे की बात कही ! काश हम और हमारा नेतृत्व कुछ सबक ले और ठोस कार्यवाही की जासके ! ४४ घंटे हो चुके हैं ! अब अंदाज ही लगाया जा सकता है की कितनी तैयारी होगी ! ४७७ कमांडो जूझ रहे रहे हैं पर नतीजा...?

डॉ .अनुराग उवाच

हम भी यही कामना करते है अभिषेक ......की राजनैतिक स्तर पर कोई बदलाव हो.ओर एक फेडरल एजेन्सी की भी स्थापना हो......हमारे प्रधान मंत्री सख्ती से निर्णय लेने के लायक बने ओर हमें कोई लौह पुरूष मिले.

कार्तिकेय उवाच

अभिषेक जी,
किस किस को कोसेंगे, जिस-जिस से उम्मीद थी, वे सभी नकारा निकले. अब तो सिर्फ़ एक तख्तापलट और निर्मम तानाशाही ही विकल्प बचा लगता है.
मेरी समझ में अभी तक ये नही आया कि कल को मराठा मानूस की बात करने वाले आज कहाँ छिपे हैं? यह आतंकी कार्रवाई सारी जम्हूरियत के मुंह पर तमाचा है. वे सिर्फ़ यह जताने की कोशिश कर रहे हैं की तुम सालों आपस में ही लड़ते रहो, हम तो तुम्हें हर हाल में मारते रहेंगे...

आभा उवाच

दो तरह के कुत्तो हैं देश में ,एक जो देश के प्रति ज्यादा इमानदार जो सूघ कर मुजरीम को पकङ़ते है पर इन नेता रूपी कुत्तों का क्या किया जाए...,जिनकी वजह से हमारे तीन बड़े अधिकारी गए, कमांडो तक शहीद हुए और इतनी सारी जनता मारी गई...होटेल ताज को सुलगना पड़ा

राज भाटिय़ा उवाच

अभिषेक,हम तो बस यही कहेगे आमीन.

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा उवाच

इन नेताओ की करतूत के कारण देश आतंकवाद की आग में झुलस रहा है . देश में नेताओ में आतंकवाद से निपटने की दम नही है इन्हे तो बस मुंह चलाना आता है .

Manish Kumar उवाच

Griha Mantri to resign kar chuke hain..par bahut deri se liya gaya ye decision. Par kuch isteefon se system to nahin badlega.

योगेन्द्र मौदगिल उवाच

करनाल की संस्था हिफा के निदेशक पीयूष जी का एसएमएस पढ़ें
यह मेरे मोबाइल पर आया
आप सभी में बांट रहा हूं किः-

where is Raaj Thakre ?
Tell him that 200 nsg commondos from delhi (all north indians) being sent 2 fight the terrorists. So that he and his "Marathi Manus" can sleep peacefully.. Now tell him to ask them to leave Mumbai ! Please send this msg to all indians. So atleast Mr. Raj will get this message somehow.

नीरज गोस्वामी उवाच

अभिषेक जी...ये समय शुब्द हो कर एक दूसरे पर कीचड उछालने का नहीं है...ये समय है हमें अपने व्यक्ति गत स्वार्थ से पहले अपने देश को रखने का...जिस दिन देश हमारी पहली आवश्यकता हो जाएगा इस तरह की कार्यवाहियां स्वतः ही थम जाएँगी...
नीरज

स्वाति उवाच

ek vicharottejak lekh.
wakai aaj har bhartiya ko jagrut hone ki atyant aawashyakta hai.
-swati

Meenakshi Kandwal उवाच

जिस देश के नेता एक शहीद के परिवार को सांत्वना दे पाने की बजाय उऩ्हें गालियां देते हैं और श्रद्धांजलि देने वालों पर भी दोष मढ़ते हैं, उनसे और उम्मीद भी क्या की जा सकती है। लेकिन इस हमले के बाद जनता का जो गुस्सा उमड़ा है.... उसे देखते हुए ये ज़रुर कह सकते हैं कि नेताओं को उनकी औकात ज़रुर पता चल गई है।

Mrs. Asha Joglekar उवाच

गृह मंत्री के लिये शब्द है ना, लिजलिजा पर शुंदर पैकिंग में लिपटा । हमे अपने लेवल से ही इस सिस्टिम में सुधार लाना होगा कि हम रिस्वत देकर काम नही करायेंगे । रिझर्वेशन के लिये भी नही ।